New fairy tales hindi चैत्रा और सिद्धार्थ की दोस्ती ताबीज एक रहस्य पार्ट3

दोस्तो इस कहानी के पिछले अध्याय New fairy tales ताबीज का रहस्य भाग 2 में हमने पढा की सिद्धार्थ के कॉलेज में चैत्रा नाम की एक लड़की आयी थी जो कि चेन्नई से थी और प्रिंसीपल ने उसे हिंदी सीखाने के लिए कहा लेकिन सिद्धार्थ तो पहले ही उसको नापसन्द कर चुका था तो चलिए शुरू करता हूँ आगे की कहानी New fairy tales hindi चैत्रा और सिद्धार्थ की दोस्ती ताबीज का रहस्य भाग 3 .

New fairy tales hindi चैत्रा और सिद्धार्थ की दोस्ती ताबीज का रहस्य भाग 3

चैत्रा सिद्धार्थ के पीछे वाली सीट पर बैठ जाती है जिस पर सुधा बैठी थी।
सुधा भी सिद्धार्थ की अच्छी दोस्त थी वो चैत्रा को कहती है हाई मेरा नाम सुधा है क्या तुम मेरी दोस्त बनोगी।
तब चैत्रा अटकते हुई हिंदी में बोली मएरा नाम चैत्रा है अउर मई चेन्नई से हूँ हां मुझे पता है अभी तो प्रिंसिपल ने बताया।
लेकिन चैत्रा को बहुत ही कम हिंदी आती थी लेकिन वो हां में अपनी गर्दन हिलाती रही।
इसके बाद प्रोफेसर आये और उन्होंने पढ़ाना शुरू कर दिया।
सिद्धार्थ कॉलेज खत्म होने के बाद घर जाने के लिए निकला तो सुधा ने उसको आवाज दी और कहा कि सिद्धार्थ रुको मैं भी तुम्हारे साथ चलती हूँ रास्ते मे मुझे भी घर छोड़ देना।
सिद्धार्थ ने सुधा को कठोर शब्दो मे कहा हो गयी दोस्ती उस चैत्रा से तब सुधा ने कहा तुम ऐसे क्यों बोल रहे हो यार वो यहां पर नई है।
साथ मे उसको हिंदी भी कम आती है हमको तो उसकी मदद करनी चाहिए।
तब सिद्धार्थ ने उसके रंग पर कॉमेंट करते हुए कहा कि उस कोयल की मदद तुम ही करो मुझे बक्श दो।
तब सुधा ने कहा चलो उसे जाने दो मुझे घर तक छोड़ दो।
सिद्धार्थ ने अपनी बाइक निकाली और सुधा को पीछे बैठाया।
अगले दिन चैत्रा फिर से सिद्धार्थ के पीछे वाली बेंच पर जाकर सुधा के पास बैठ गयी।
कॉलेज खत्म होने के बाद सुधा सिद्धार्थ के पास आई और उसको पूछा कि क्या तुम तुम्हारे गले के ताबीज के बारे में कुछ बता सकते हो तब सिद्धार्थ ने कहा कि अचानक तुमको आज मेरे ताबीज के बारे में क्यों जानना है।
तब सुधा ने कहा कि बिलकुल तुम्हारे जैसा ही एक ताबीज मैंने चैत्रा के गले मे देखा मैंने उसको जब पूछा कि ये ताबीज तुम्हे कहाँ से मिला तो उसने कहा कि ये ताबीज मुझे मेरे पिता ने दिया था और ये कहा था कि तुम इसे कभी नही निकालना।
सिद्धार्थ ने कहा की ये सब मेरे पिता जी ने भी कहा था जब उन्होंने मुझे ये ताबीज दिया था।
तब सिद्धार्थ कहता है कि ये बात तो मुझे जाननी ही है कि आखिर इस ताबीज का रहस्य क्या है।
बचपन से मैं ये जानना चाहता था कि आखिर इस ताबीज का क्या राज है लेकिन वक्त के साथ मैं इस ताबीज को भूलता गया लेकिन अब तो इसके बारे मे जानकारी प्राप्त करनी ही होगी।
अब सिद्धार्थ चैत्रा से दोस्ती करने के लिए तैयार हो जाता है।
अगले दिन वो पहले ही कॉलेज में आ गया और चैत्रा का इंतजार करने लगा।
आज चैत्रा सफेद रंग का सूट पहन कर आई थी। सिद्धार्थ ने कहा है चैत्रा कैसी हो।
तब चैत्रा ने कहा i am fine हाऊ आर यु सिद्धार्थ ने भी फाइन कहा फिर दोनों क्लास में चले गए सिद्धार्थ ने कहा जब तक सुधा आती है तब तक तुम में साथ बैठ सकती हो।
मैं तुमको हिंदी के कुछ वर्ड्स भी सीखा दूंगा।
ये सब कन्वर्सेशन इंग्लिश में हो रहा था चैत्रा उसके साथ बैठ गयी।
अब सिद्धार्थ उसको हिंदी के कुछ वर्ड्स सिखाने लग गया।
फिर उनकी क्लास शुरू हो गयी आज सुधा कॉलेज नही आई थी तो चैत्रा सिद्धार्थ के साथ ही बैठी रही।
अब उन दोनों के बीच अच्छी दोस्ती भी हो गयी सिद्धार्थ ने चैत्रा को कहा कि मैंने तुम्हारे बारे में अपने दोस्तों से बहुत बुरा भला कहा था प्लीज मुझे माफ़ कर दो।
चैत्रा ने कहा कोई बात नही तुमने अपनी गलती मानी ये ही मेरे लिए बहुत है। फिर दोनों दोस्त बन जाते है।
फिर एक दिन दोनो कहीं घूमने जाते है तब सिद्धार्थ चैत्रा को बताता है कि तुम्हारे जैसा ही एक ताबीज मेरे पास भी है क्या तुम इसके बारे में कुछ जानती हो क्या तुम्हारे पिताजी ने इसके बारे में कुछ बताया था।
चैत्रा ने कहा कि बताया तो नही था लेकिन मैंने उनको किसी से कहते सुना था कि ये एक जादुई ताबीज है इसमें क्या शक्तियां है मुझे ये नही पता तभी एक आदमी वहां आता है और कहता है मुझे पता है इस ताबीज का राज और ये भी पता है कि तुम्हारे पिता ने तुमको ये ताबीज क्यों पहनाए है।
तो वो आदमी कौन था और वो किस राज की बात कर रहा था क्या सिद्धार्थ और चैत्रा जान पाएंगे अपने ताबीज के रहस्य को जानने के लिए जुड़े रहें और इंतजार कर इस कहानी के अगले अध्याय का।


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